“Live as if you were to die tomorrow. Learn as if you were to live forever.”

"जिस दिन आपके सामने कोई समस्या न आये उस दिन आप यकीन कर सकते है की आप गलत रास्ते पर जा रहे है"

“They cannot stop me. I will get my education, if it is in the home, school, or anyplace.”

“एक बेहतरीन किताब 100 अच्छे दोस्त के बराबर है, लेकिन एक सर्वश्रेष्ठ दोस्त पुस्तकालय के बराबर है।”

“Live as if you were to die tomorrow. Learn as if you were to live forever.”

"जिस दिन आपके सामने कोई समस्या न आये उस दिन आप यकीन कर सकते है की आप गलत रास्ते पर जा रहे है"

“Anyone who has never made a mistake has never tried anything new.”

“एक व्यक्ति ने कभी गलती नहीं की, जब उसने कभी भी कुछ नया करने की कोशिश नहीं की यानी जब हम कुछ नया करते है तभी गलतियां होना स्वाभाविक है।”

“Start where you are. Use what you have. Do what you can.”

ज्ञान ही शक्ति है। जानकारी स्वतंत्रता है। प्रत्येक परिवार और समाज में शिक्षा, प्रगति का आधार है।

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Monday, June 2, 2025

Top 10 प्रेरणादायक सुविचार | Best Inspirational Thoughts for Students & Teachers in Hindi

Top 10 प्रेरणादायक सुविचार | Best Inspirational Thoughts for Students & Teachers in Hindi

Top 10 Suvichar 2025

विद्यार्थियों और शिक्षकों के लिए प्रेरणादायक सुविचार न सिर्फ मनोबल बढ़ाते हैं, बल्कि जीवन के कठिन रास्तों में मार्गदर्शन भी करते हैं। यहां हम प्रस्तुत कर रहे हैं 10 सर्वश्रेष्ठ सुविचार, जो छात्रों और शिक्षकों दोनों के लिए अत्यंत उपयोगी हैं।

विद्यार्थियों और शिक्षकों के लिए प्रेरणादायक सुविचार

  1. “Education is the most powerful weapon which you can use to change the world.”
    – Nelson Mandela
  2. “Every child is an artist. The problem is how to remain an artist once we grow up.”
    – Pablo Picasso
  3. “शिक्षा वह चाबी है जो सफलता के द्वार खोलती है।”
  4. “यदि आप खुद पर विश्वास रखते हैं, तो कुछ भी असंभव नहीं है।”
  5. “सपने वो नहीं जो आप नींद में देखें, सपने वो हैं जो आपको नींद से जगा दें।”
    – A.P.J. Abdul Kalam
  6. “महान शिक्षक कभी नहीं पढ़ाते, वे प्रेरणा देते हैं।”
  7. “शिक्षा जीवन की तैयारी नहीं है, शिक्षा स्वयं जीवन है।”
    – John Dewey
  8. “Dreams are not what you see in sleep. Dreams are what keep you awake.”
  9. “ज्ञान का सच्चा उपयोग तब होता है जब उसे दूसरों के साथ साझा किया जाए।”
  10. “Teaching is the profession that creates all others.”

निष्कर्ष

इन सुविचारों को जीवन में अपनाकर विद्यार्थी और शिक्षक सकारात्मक परिवर्तन ला सकते हैं। स्कूल और कॉलेजों में इन विचारों को शेयर करना छात्रों के आत्म-विश्वास को बढ़ावा देता है।

आप क्या कर सकते हैं?

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Saturday, May 31, 2025

राजस्थान यूनिवर्सिटी एडमिशन फॉर्म 2025-26 | ऑनलाइन आवेदन, अंतिम तिथि


rajasthan university admission form 2025-26

राजस्थान यूनिवर्सिटी ने स्नातक (UG) पाठ्यक्रमों जैसे बीए, बीएससी और बीकॉम में प्रवेश के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी है। 12वीं कक्षा उत्तीर्ण विद्यार्थी अब अपने पसंदीदा कॉलेजों में दाखिला पाने के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।

प्रवेश प्रक्रिया व सीटें

राजस्थान यूनिवर्सिटी के अंतर्गत संचालित कॉलेजों में लगभग 6000 से अधिक सीटें उपलब्ध हैं। प्रमुख कॉलेजों में शामिल हैं:

  • महारानी कॉलेज – 2530 सीटें

  • महाराजा कॉलेज – 1020 सीटें

  • कॉमर्स कॉलेज – 1500 सीटें

  • राजस्थान कॉलेज – 960 सीटें

आवेदन की अंतिम तिथि 8 जून 2025 है। मेरिट सूची 12वीं कक्षा के अंकों के आधार पर तैयार की जाएगी। प्रथम मेरिट सूची 18 जून 2025 को जारी होगी। नया सत्र 1 जुलाई 2025 से शुरू होगा।

आवश्यक दस्तावेज़:

प्रवेश के समय सत्यापन के लिए नीचे दिए गए दस्तावेज़ अनिवार्य हैं:

  • आधार कार्ड

  • 10वीं व 12वीं की मार्कशीट और प्रमाण पत्र

  • मूल निवास प्रमाण पत्र

  • ट्रांसफर सर्टिफिकेट (T.C.)

  • चरित्र प्रमाण पत्र

  • गैप सर्टिफिकेट (यदि हो)

  • पासपोर्ट साइज फोटो

  • जाति प्रमाण पत्र (यदि लागू हो)

  • नॉन क्रीमी लेयर प्रमाण पत्र

  • आय प्रमाण पत्र

  • माइग्रेशन सर्टिफिकेट

  • वेटेज सर्टिफिकेट (यदि लागू हो)

  • दिव्यांग प्रमाण पत्र (यदि लागू हो)

  • एंटी रैगिंग हलफनामा

  • ग्रुप बीमा फॉर्म

ऑनलाइन फॉर्म कैसे भरें?

  1. राजस्थान यूनिवर्सिटी की ऑफिशियल वेबसाइट पर जाएं।

  2. "New Admission" सेक्शन में जाएं।

  3. निर्देश पढ़ें और कोर्स का चयन करें।

  4. सभी जरूरी जानकारी भरें और दस्तावेज़ अपलोड करें।

  5. आवेदन पत्र जमा करें और उसकी एक प्रति डाउनलोड कर प्रिंट निकालें।

महत्वपूर्ण तारीखें:

चरण                  तारीख
आवेदन प्रारंभ                        28 मई 2025
अंतिम तिथि                        8 जून 2025
प्रथम मेरिट लिस्ट                     18 जून 2025
सत्र प्रारंभ                       1 जुलाई 2025

सीधे फॉर्म भरने के लिए क्लिक करें: यहां आवेदन करें



Friday, April 24, 2020

विश्व मलेरिया दिवस

राष्ट्रीय-मलेरिया-दिवस,Rashtriya malaria divas
मलेरिया दिवस

                                                      * विश्व मलेरिया दिवस *
     विश्व मलेरिया दिवस हम 25 अप्रैल को मनाते है, मलेरिया दिवस मनाने का मुख्य उदेश्य यह जानना है की
     मलेरिया के नियंत्रण हेतु किस प्रकार के विश्व स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं।
    मलेरिया मच्छरों के कारण फैलने वाली बीमारी है जिसके कारण हर वर्ष हजारो लोग अपनी जान दे देते हैं।
   " प्रोटोजुअन प्लाज्‍मोडियम " नामक कीटाणु मादा एनोफिलीज मच्छर से मलेरिया फैलता है । पूरे विश्व की
    कुल जनसंख्या में लगभग 106 देश ऐसे हैं जिनको मलेरिया का खतरा है वर्ष 2012 में मलेरिया के कारण
    लगभग 6,27,000 मृत्यु हुई जिनमें से अधिकांश अफ्रीकी, एशियाई, लैटिन अमेरिकी बच्चे शामिल थे |
    मादा एनोफिलीज मच्छर जिस से मलेरिया फैलता है इसका प्रभाव कुछ प्रतिशत तक मध्य पूर्व तथा कुछ
    यूरोप के भागों में भी देखने को । विश्व मलेरिया दिवस ऐसी 8 आधिकारिक वैश्विक सामुदायिक स्वास्थ्य
    अभियानों में से एक हैं, जिसे WHO( विश्व स्वास्थ्य संगठन ) द्वारा चिन्हित किया गया,इन वैश्विक
    सामुदायिक स्वास्थ्य अभियानों में विश्व स्वास्थ्य दिवस, विश्व रक्तदाता दिवस, विश्व टीकाकरण सप्ताह,
    विश्व तपेदिक दिवस, विश्व तंबाकू निषेध दिवस, विश्व हेपेटाइटिस दिवस एवं विश्व एड्स दिवस शामिल हैं ।


                                                 
                                            आखिर मलेरिया होता कैसे है ?

    केवल मलेरिया के रोगाणु का वाहक मादा मच्छर है, क्योंकि रोगाणु मच्छर के शरीर में एक परजीवी की तरह
    फैलता है और मच्छर जब किसी मनुष्य को कटता है तो लार के साथ मनुष्य के शरीर में परिविष्ट हो जाता
    है । रोगाणु एक कोषीय होता है जिसेको प्लास्मोडियम कहते है, रोगाणुओ की क़िस्म के अनुसार मलेरिया के
    तीन प्रकार होते हैं :-
    1. मलेरिया टर्शियाना 
    2. क्वार्टाना 
    3. ट्रोपिका
    इन सब मे सबसे अधिक जहरीला मलेरिया ट्रोपिका होता है, जो पी.फ़ाल्सिपेरम नामक रोगाणु से फैलता है
    और इसी रोगाणु के कारण हर साल भारत में भी मलेरिया फैलता है ।


                                     * मलेरिया के लक्षण *

   मलेरिया का संक्रमण होने और फैलने में लगभग 1 सप्ताह से 1 महीने का समय भी लग सकता हैं।
   मलेरिया के शुरुवाती लक्षणों की हम बात करे तो इसमे सर्दी-जुकाम या पेट की गड़बड़ी के लक्षण दिखाई दे
   सकते हैं , लेकिन ये मेलरिया की शुरुवात की पहली सिड्डी होती है, जिससे यह कहना मुश्किल है कि मेलरिया
   हुआ है या नही हुआ । लगभग एक सप्ताह बीत जाने के बाद सिर, शरीर और जोड़ों में दर्द, ठंड लग कर बुख़ार
   आना, नब्ज़ तेज़ हो जाना, खाना खाने का मन ना होना , उल्टी या पतले दस्त होना जैसे लक्षण दिखाई देने
   लगते है। मलेरिया की सबसे खतरनाक स्थिति तब मानी जाती है जब बुखार अचानक से बढ़ कर 3-4 घंटे
   रहता है और अचानक चढ़ता और उतर जाता है |



                                                   * एक नजर इतिहास पर *

    विश्व मलेरिया दिवस की स्थापना मई ,2007 में 60 वे विश्व स्वास्थ्य सभा के सत्र के दौरान की गई।
    विश्व मलेरिया दिवस की स्थापना से पहले 25 अप्रैल, 2001 से मनाए जाने वाले अफ्रीका मलेरिया दिवस के
    एक वर्ष पश्चात ऐतिहासिक अबुजा घोषणा में 44 मलेरिया ग्रसित देशों ने अफ्रीकी शिखर सम्मेलन मे
    हस्ताक्षर किए |


                                                        * अनमोल विचार *

  1.   " रखना है अपनी गली मोहले की सफाई तभी तो मलेरिया पर जीत
          होगी मेरे भाई " |
  2.  " मलेरिया छु भी नहीं पाएगा , जो तुम  नाली गंदे पानी की समय पर
         सफाई करवाएगा " |
  3.  " मै भी सुरक्षित रहूँगा औरों को भी रखूँगा,कोई करे या न करे मे अपने
         आस पास की सफाई खुद करूंगा " |
  4.  " मलेरिया होगा बड़ा विद्वान,मैंने भी जान लिया है उस से लड़ने का
        समाधान "|
  5.  " आओ मिलकर मलेरिया को भगाए,खुद को भी बचाए देश को भी
          बचाए " |
  6.  " बारिश के पानी को व्यर्थ इकट्टा होने नहीं देना,मच्छर का घर अपने
        यहा बनने न देना ,मलेरिया से बचना है क्यौकी ये जानलेवा होता 
        है  " |

विश्व धरोहर दिवस

विश्व-धरोहर-दिवस
                                                         
                                                          विश्व धरोहर दिवस 
विश्व धरोहर दिवस  (World Heritage Day) प्रतिवर्ष 18 अप्रैल  को मनाया जाता है |
इस दिवस को मनाने का मुख्य उद्देश्य भी यह है कि पूरे विश्व में मानव सभ्यता से जुड़े ऐतिहासिक और सांस्कृतिक स्थलों के संरक्षण के प्रति जागरूक किया जा सके सके |
संयुक्त राष्ट्र की संस्था यूनेस्को की पहल पर एक अंतर्राष्ट्रीय संधि की गई ज्योति विश्व के सांस्कृतिक प्राकृतिक धरोहर के संरक्षण के हेतु प्रतिबद्ध है |
यह संधि सन 1972 में लागू की गई प्रारंभ में मुख्यता तीन श्रेणियों में धरोहर स्थलों को शामिल किया गया तहरी वह धरोहर स्थल जो प्राकृतिक रूप से संबद्ध हो
अर्थात प्राकृतिक धरोहर स्थल दूसरे सांस्कृतिक धरोहर स्थल और तीसरा मिश्रित धरोहर स्थल वर्ष 1982 में इकोमार्क नामक संस्था ने ट्यूनिशिया में अंतर्राष्ट्रीय स्मारक
 और स्थल दिवस का आयोजन किया तथा उस सम्मेलन में यह भी बात उठी कि विश्व भर में किसी प्रकार के दिवस का आयोजन किया जाना चाहिए यूनेस्को की महासम्मेलन में इसके अनुमोदन के पश्चात 18 अप्रैल को विश्व धरोहर दिवस के रूप में मनाने के लिए घोषणा की गई पूर्व में 18 अप्रैल को विश्व स्मारक तथा पुरातत्व स्थल दिवस के रूप में मनाए जाने की परंपरा थी |
                          
                             * भारत के विश्व धरोहर स्थल *
युनेस्को विश्व विरासत स्थल  उन खास स्थानों (जिनमें वन क्षेत्र, पर्वत, झील, मरुस्थल, स्मारक, भवन, या शहर इत्यादि) को कहा जाता है, जो विश्व विरासत स्थल समिति द्वारा चयनित होते हैं | यही समिति इन स्थलों की देखरेख युनेस्को की अंतर्गत  करती है।
इस कार्यक्रम का उद्देश्य विश्व के ऐसे स्थलों को चयनित एवं संरक्षित करना होता है ,जो विश्व संस्कृति की दृष्टि से मानवता के लिए महत्वपूर्ण हैं। कुछ खास परिस्थितियों में ऐसे स्थलों को इस समिति द्वारा आर्थिक सहायता भी दी जाती है। 
अब तक (जुलाई 2019 तक) पूरी दुनिया में लगभग 1121 स्थलों को विश्व विरासत स्थल घोषित किया जा चुका है ,जिसमें 869 सांस्कृतिक, 213 प्राकृतिक, 39 मिले-जुले और 138 अन्य स्थल हैं।
                     ---अभी तक भारत में 39 विश्व विरासत स्थल है ---

यूनेस्को द्वारा विश्व विरासत घोषित किए गए भारत में स्थित सांस्‍कृतिक और प्राकृतिक स्‍थलों की विश्व विरासत स्थल सूची |
                                                    * धरोहर सूची *


  1. अजंता गुफाएँ                                                   औरंगाबाद, महाराष्ट्र
  2. आगरा का किला                                               आगरा, उत्तर प्रदेश
  3. ताज महल                                                        आगरा, उत्तर प्रदेश
  4. एलोरा गुफाएं                                                     महाराष्ट्र
  5. कोणार्क सूर्य मंदिर                                             ओडिशा
  6. महाबलिपुरम के स्मारक समुह                           तमिलनाडु
  7. केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान                                   राजस्थान
  8. काज़ीरंगा राष्ट्रीय उद्यान                                    असम
  9. मानस राष्ट्रीय उद्यान                                         असम
 10. गोवा के गिरजाघर एवं कॉन्वेंट                             गोवा
 11. हम्पी                                                                  कर्नाटक
 12. फतेहपुर सीकरी                                                   उत्तर प्रदेश
 13. खजुराहो स्मारक समूह                                        मध्य प्रदेश
 14. सुंदरवन राष्ट्रीय उद्यान                                      पश्चिम बंगाल
 15. एलिफेंटा की गुफाएँ                                              महाराष्ट्र
 16. पत्तदकल                                                           कर्नाटक
 17. महान चोल मंदिर                                                 तमिलनाडु
 18. नन्दा देवी राष्ट्रीय उद्यान एवं फूलों की घाटी          उत्तराखण्ड
 19. साँची के बौद्ध स्तूप                                               मध्य प्रदेश
 20. हुमायूँ का मकबरा                                                 दिल्ली
 21. कुतुब मीनार एवं अन्य स्मारक                             दिल्ली
 22. भारतीय पर्वतीय रेल,                                            दार्जिलिंग
 23. बोधगया का महाबोधि विहार                                 बिहार
 24. भीमबेटका शैलाश्रय                                              मध्य प्रदेश
 25. चंपानेर-पावागढ़ पुरातत्व उद्यान                          गुजरात
 26. छत्रपति शिवाजी टर्मिनस                                       महाराष्ट्र
 27. दिल्ली का लाल किला                                           राजस्थान
 28. पश्चिमी घाट                                                         महाराष्ट्र, गोवा, कर्नाटक, तमिलनाडु और केरल
 29. राजस्थान के पहाड़ी दुर्ग                                         राजस्थान ( राजस्थान के पहाड़ी दुर्ग, राजस्थान की 
                                                                                   अरावली पर्वतमाला में स्थित विभिन्न स्थलों की 
                                                                                   श्रंखला है।
                                                                                   वे एक राजपूती सैन्य पहाड़ी स्थापत्य-कला का नमूना
                                                                                    पेश  करते हैं,  जिनकी पहचान उनके पहाड़ी शिखरों
                                                                                    पर स्थित होने, वहां के भौगोलिक स्थिति का  
                                                                                   रक्षात्मक उपयोग करने से होती हरा जस्थान के ये
                                                                                   दुर्ग, व्यापक श्रृंखला के भौगोलिक एवं सांस्कृतिक 
                                                                                   क्षेत्रों में स्थित मजबूत राजपूत सैन्य शक्ति का 
                                                                                   प्रतिनिधित्व करते हैं | इन दुर्गों से राजपूत
                                                                                   रक्षात्मक वास्तुकला के विकास का अंदाज़ा लगाया जा
                                                                                   सकता है तथा ये राजपूत सैन्य  वास्तुकला  के
                                                                                   उदाहरण हैं।  राजपूत दुर्ग अपने बेमिसाल स्थापत्य 
                                                                                    कला के लिए प्रसिद्ध  हैं। अक्सर, उनकी सीमा मे कई  
                                                                                    बड़े क्षेत्र, यहां तक कि कई गांव भी ,सुरक्षा 
                                                                                     दीवारों के भीतर आ जाते हैं। इन दुर्गों में  चित्तौड़ 
                                                                                     दुर्ग,   कुंभलगढ़ दुर्ग, रणथंभौर दुर्ग, गागरोन
                                                                                     दुर्ग, आमेर दुर्ग तथा जैसलमेर दुर्ग आते हैं। इन
                                                                                     किलों  के परिसरों में महल, हिंदू और जैन मंदिर,  
                                                                                     शहरी केंद्र और व्यापारिक केंद्र शामिल हैं। )
 30. ग्रेट हिमालयन राष्ट्रीय उद्यान                               हिमाचल प्रदेश
 31. रानी की वाव                                                            गुजरात
 32. नालन्दा महाविहार (नालंदा विश्वविद्यालय)             बिहार ( बिहार में नालंदा पुरातत्व साइट सीखने का
                                                                                     एक केंद्र और 13 वीं सदी के लिए 3 शताब्दी ईसा पूर्व
                                                                                     से एक बौद्ध मठ था |
 33. कंचनजंगा राष्ट्रीय उद्यान                                      सिक्किम ( भारत में स्थित एक राष्ट्रीय उद्यान
                                                                            और  एक बायोस्फीयर रिज़र्व है |
 34. ली कोर्बुज़िए के वास्तुशिल्प                                      चंडीगढ़ ( चंडीगढ़ की राजधानी परिसर सहित कई 
                                                                                       देशों भर ली कोर्बुज़िए के  वास्तुशिल्प काम 
                                                                                       आधुनिक आंदोलन के लिए उत्कृष्ट योगदान के 
                                                                                       हिस्से के रूप में एक विश्व विरासत स्थल के रूप में
                                                                                        मान्यता दी गई थी |
 35. अहमदाबाद का ऐतिहासिक शहर                                 गुजरात गुजरात ( 606 साल पुरानी सिटी 
                                                                                        अहमदाबाद  अब विश्व धरोहर सिटी के नाम 
                                                                                        से जानी  जाएगी |
 36. मुंबई का विक्टोरियन और आर्ट डेको एनसेंबल             मुंबई  ( भारत के
                                                                               ‘मुंबई के विक्टोरियन गोथिक  एवं  आर्ट डेको इंसेबल्स‘ 
                                                                                        को यूनेस्को की विश्व 
                                                                                        धरोहर  संपदा की सूची में अंकित किया गया | 
                                                                                        यह निर्णय बहरीन के मनामा में यूनेस्को की विश्व
                                                                                        धरोहर समिति के 42वें सत्र में लिया गया।
 37. गुलाबी शहर                                                             2019 जयपुर ( यूनेस्को ने शनिवार दोपहर ट्वीट
                                                                                        किया, भारत के राजस्थान में  जयपुर शहर को 
                                                                                        यूनेस्को  के विश्व धरोहर स्थल के तौर पर चिन्हित
                                                                                         किया गया  (अजरबैजान) में 30 जून से 10 जुलाई 
                                                                                         तक यूनेस्को की विश्व धरोहर कमेटी के 43 वें सत्र 
                                                                                         के बाद इसकी घोषणा की गयी |

38. जंतर मंतर, जयपुर                                                    राजस्थान


                     यूनेस्को की विश्व धरोहर समिति के सदस्य
  सदस्य राष्ट्र                            सत्र
 अंगोला                           2015-2019
 अज़रबैजान                    2015-2019
 बुर्किना फासो                  2015-2019
 क्रोएशिया                       2013-2017
 क्यूबा                             2015-2019
 फ़िनलैंड                          2013-2017
 इंडोनेशिया                      2015-2019
 जमैका                            2013-2017
 कजाखस्तान                   2013-2017
 कुवैत                               2015-2019
 लेबनान                           2013-2017
 पेरू                                  2013-2017
 फिलीपींस                         2013-2017
 पोलैंड                               2013-2017
 पुर्तगाल                            2013-2017
 कोरिया गणराज्य              2013-2017
 ट्यूनीशिया                       2015-2019
 तुर्की                                 2013-2017
 तंजानिया                         2015-2019
 वियतनाम                        2013-2017
 जिम्बाब्वे                         2015-2019

             कुल  = 21


Wednesday, April 22, 2020

भारतीय रेलवे दिवस

                                      
भारतीय रेल्वे दिवस,भारतीय रेल का विश्व में कौनसा स्थान है,indian railways
INDIAN RAILWAY
     
                               भारतीय रेलवे दिवस
   भारतीय रेलवे दिवस 16 अप्रैल को मनाया जाता है क्योकि आज के दिन 16 अप्रैल 1853 को भारत मे
    सर्वप्रथम रेल को चलाया गया था | जो की मुंबई से ठाने की बीच चलाई गई थी जिसकी कुल यात्रा 34
    किलोमीटर थी | आज 16 अप्रैल 2020 को भारतीय रेलवे को 167 साल पूरे हो गए है |
    इस रेल मे 14 डिब्बे जिसे 21 तोपों की सलामी दी गई थी और इसमें 400 यात्रियों ने यात्रा की थी।
    पहली रेल को तीन लोकोमोटिव सिंधु, साहिब और सुल्तान ने खींचा था।

   भारतीय रेल एशिया का दूसरा सबसे बड़ा रेल नेटवर्क है साथ ही एकल सरकारी स्वामित्व वाला विश्व का
  चौथा सबसे बड़ा रेल नेटवर्क भारतीय रेल है |

         

                                                  भारतीय रेलवे के मुख्य खंड 

   भारतीय रेल के दो मुख्य खंड है - माल वाहन और सवारी |माल खंड से लगभग दो तिहाई राजस्व आता है और
   बाकी सवारी यातायात से आता है | माल खंड के थोक यातायात का लगभग 95 % के आस-पास है जो ज्यादा
   कोयले से आता है |


                                                  भारत मे रेल की शुरुवात
    सन् 1848 में बम्बई में ग्रेट इण्डियन पेनिनसुला रेलवे कम्पनी की स्थापना की गई थी |
    सन् 1850 में इसी कम्पनी ने बम्बई से थाणे तक रेल लाइन बिछाने का कार्य प्रारम्भ किया गया था |
    आज भारतीय रेलवे बहुत बड़े भाग मे फेल चुका है |
    आज भारतीय रेल मार्ग की लंबाई लगभग 1,15,000 किलोमीटर  है जो की 7172 रेलवे स्टेशनो जुड़ा हुआ है |
    भारतीय रेलवे को 17  जोन्स में विभाजित किया गया है।
    हर जोन में रेलमंडल बनाए गये हैं, भारत में अभी कुल 67 रेलमंडल है जो उपरोक्त 18 जोन के अंदर कार्य
     करते हैं।
 

                                        उपलब्धियाँ

1.   दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे जो पतली गेज की एक बहुत पुरानी रेल व्यवस्था है उसे यूनेस्को द्वारा विश्व
      विरासत घोषित किया गया है। दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे जो पतली गेज की एक बहुत पुरानी रेल
      व्यवस्था है उसे यूनेस्को द्वारा विश्व विरासत घोषित किया गया है।
2.  लाइफ लाईन एक्सप्रेस भारतीय रेल की चलने वाला अस्पताल सेवा जो दुर्घटनाओं एवं अन्य स्थितियों में
      प्रयोग की जाती है।
3.   नीलगिरि पर्वतीय रेल को भी विश्व विरासत मे शामिल किया गया है।
4.   कोंकण रेलवे
5.   थार एक्सप्रेस
6.   पैलेस आन व्हील्स
7.   राजधानी एक्सप्रेस
8.   समझौता एक्सप्रेस
9.   शताब्दी एक्सप्रेस

                                                     
                                                       रेलवे प्रशिक्षण केंद्र
1.    इंडियन रेलवे इंस्टीट्यूट ऑफ इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग, नासिक।
2.    इंडियन रेलवे इंस्टीट्यूट ऑफ सिग्नल इंजीनियरिंग एंड हेली कम्यूनिकेशन, सिकंदराबाद।
3.    रेलवे स्टाफ कालेज, बड़ौदा
4.    इंडियन रेलवे इंस्टीट्यूट ऑफ मेकेनिकल एंड इलिक्ट्रोनिक, इंजीनियरिंग, जमालपुर।
5.    इंडियन रेलवे इंस्टीट्यूट ऑफ सिविल इंजीनियरिंग, पुणे


                                                      ईंजन निर्माण केंद्र
1.  डीजल लोकोमोटिव वर्क्स, वाराणसी (डीजल इंजन)
2.  भारत हैवी इलेक्ट्रिकल लिमिटेड, भोपाल (डीजल इंजन)
3.  टाटा इंजीनियरिंग एंड लोकोमोटिव कम्पनी लिमिटेड, चितरंजन (डीजल इंजन)
4.  रेल ईंजन निर्माण केंद्र
5.  डीजल कम्पोनेट वर्क्स, पटियाला (डीजल इंजन के पूर्जे)
6.  डीजल लोकोमोटिव कंपनी, जमशेदपुर (डीजल इंजन)
7.  चितरंजन लोकोमोटिव वर्क्स, चितरंजन (विद्युत इंजन)


                                                    डिब्बे का निर्माण केंद्र

1.   व्हील एंड एक्सेल, बेंगलुरु (कर्नाटक)
2.   चितरंजन लोकोमोटिव वर्क्स, चितरंजन
3.   भारत अर्थमूवर्स लिमिटेड बेंगलुरु (कर्नाटक)
4.   रेल कोच फैक्ट्री, कपूरथला (पंजाब) बी.जी. डिब्बा निर्माण
5.   जेसफ़ एंड कंपनी लिमिटेड, कोलकाता (पं.बंगाल)
6.   इंटीग्रल कोच फैक्ट्री पैराम्बूर (चेन्नई) बी.जी.डिब्बा निर्माण








भगवान महावीर

महावीर जयंती,महावीर स्वामी के सिद्धांत,bhagwan mahavir jayanti
                                                                                  भगवान महावीर
                                                        भगवान महावीर 
        भगवान महावीर स्वामी का जन्म 599 वर्ष पूर्व (ईसा से ) कुंडग्राम (बिहार),भारत मे हुआ । जैन धर्म के
        24 वें तीर्थंकरभगवान महावीर हुये | वर्तमान में वैशाली (बिहार) के वासोकुण्ड को यह स्थान है। 23वें
        तीर्थंकर पार्श्वनाथ जी के निर्वाण (मोक्ष) प्राप्त करने के 188 वर्ष बाद इनका जन्म हुआ था | 
        महावीर जयंती जैन समुदाय का सबसे बड़ा पर्व माना जाता है।
     
        जैन ग्रंथों के अनुसार चैत्र शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी को जैन समाज के अंतिम तीर्थंकर भगवान महावीर का
        जन्म हुआ था, जिस कारण जैन धर्म के लोग इस दिन को उनके जन्मदिवस के रूप में मनाते हैं |

       भगवान महावीर ने दुनिया को अहिंसा परमो धर्म का संदेश दिया | भगवान महावीर को बचपन मे वर्धमान
       नाम से जाना जाता था | इनका जन्म लिच्छ्हवी वंश के महाराज सिद्धार्थ व महारानी त्रिशला के हुआ
       भगवान महावीर ने ज्ञान प्राप्ति के लिए 30 साल की उम्र में राजमहलो के सुखो को छोड़ दिया |
       भगवान महावीर ने तपोमय साधना का रास्ता चुना और 12 वर्षो का कठोर तप कर अपनी इंद्रियो
       को जीत लिया |

                                                                    सिद्धांत
       भगवान महावीर ने अहिंसा परमो धर्म के सिद्धांत पर ज़ोर दिया और भगवान महावीर ने अपने अनुयायीयो
       को अहिंसा,सत्य,अस्तेय,अपरिगृह और ब्रह्मचर्य पंच वर्तो का पालन करना जरूरी बताया है | अहिंसा ही
       सुख शांति देने वाली है,यही मानव का सच्चा धर्म और कर्म है |

                                                                     पंच व्रत

1.     सत्य ―  भगवान महावीर स्वामी सत्य के बारे बताया हैं की - " हे पुरुष ! सत्य ही सच्चा तत्व है ।
                       जो बुद्धिमान सत्य को जान लेता है, वह मृत्यु को भी तैरकर पार कर लेता है।

2.     अहिंसा – " इस संसार में जितने भी एक, दो, तीन, चार और पाँच इंद्रीयों वाले जीव है |
                         उनकी हिंसा मत करो, उनको उनके रास्ते पर जाने से मत रोको । इन सब के लिए अपने मन
                         में दया का भाव रखो । इनकी रक्षा करो । यही अहिंसा का संदेश भगवान महावीर अपने
                         उपदेशों दिया हैं। "

3.     अचौर्य -   " जब तक कोई अपनी वस्तु स्वंम न दे, बिना उसके दिए कोई ग्रहण करता है तो उसे जैन ग्रंथों
                          में चोरी कहा गया है "।

4.    अपरिग्रह – " अपरिग्रह पर भगवान महावीर कहना हैं की जो खुद सजीव या निर्जीव वस्तुओ का संग्रह
                           करता है, दूसरों से इस प्रकार का संग्रह कराता है या किसी को ऐसा संग्रह करने की सम्मति
                           देता है, उसे दुःखों से कभी छुटकारा नहीं मिल पाएगा । ये संदेश अपरिग्रह के द्वारा
                           भगवान महावीर ने दुनिया को दिया हैं ।"

5.   ब्रह्मचर्य-     " भगवान महावीर स्वामी ब्रह्मचर्य के बारे में बहुत ही अमूल्य उपदेश देते हैं कि ब्रह्मचर्य
                            उत्तम तपस्या, नियम, ज्ञान, दर्शन, चारित्र, संयम और विनय की मूल जड़ है । तपस्या में                                ब्रह्मचर्य श्रेष्ठ तपस्या है । जो पुरुष स्त्रियों से संबंध नहीं रखते, वे मोक्ष मार्ग की ओर
                            बढ़ते हैं। "

                                                                      धर्म
             जैन ग्रंथों में दस धर्म का वर्णन पाया जाता है । पर्युषण पर्व, जिन्हें दस लक्षण भी कहा जाता है,
             पर्युषण पर्व के समय दस दिन इन दस धर्मों का चिंतन किया जाता है।
             धर्म सबसे अधिक मंगल है। अहिंसा, संयम और तप धर्म के रूप है। भगवान महावीर ने कहा की- " जो
           धर्मात्मा है, जिसके मन में सदैव धर्म रहता है, उसे देवता भी नमन करते हैं।
           भगवान महावीर ने अपने प्रवचनों में धर्म, सत्य, अहिंसा, ब्रह्मचर्य और अपरिग्रह, क्षमा पर अत्यधि
 जोर दिया । त्याग,करुणा,प्रेम,संयम,शील और सदाचार ही उनके प्रवचनों का मूल है ।"


                                                                      क्षमा
             क्षमा के बारे में भगवान महावीर बताते हैं की - " मैं सब जीवों से क्षमा चाहता हूँ । जगत के सभी जीवों
             के प्रति मेरा मैत्रीभाव है । मेरा किसी से वैर नहीं है । मैं सच्चे हृदय से धर्म में स्थिर हुआ हूँ । सब जीवों
             से मैं सारे अपराधों की क्षमा माँगता हूँ । सब जीवों ने मेरे प्रति जो अपराध किए हैं, उन्हें मैं क्षमा
             करता हूँ ।"

            भगवान महावीर ने बताया है की- " मैंने अपने मन में जिन-जिन पाप की वृत्तियों का संकल्प किया
            हो, वचन से जो-जो पाप वृत्तियाँ प्रकट की हों और शरीर से जो-जो पापवृत्तियाँ की हों, मेरी वे सभी
            पापवृत्तियाँ विफल हों । मेरे वे सारे पाप मिथ्या हों ।"


                                                                  मोक्ष
        भगवान महावीर ने ईसापूर्व 527, 72 वर्ष की आयु में बिहार के पावापुरी में कार्तिक कृष्ण अमावस्या को
        मोक्ष प्राप्ति की । पावापुरी में एक जल मंदिर स्थित है जिसके बारे में कहा जाता है कि ये वो स्थान है जहाँ
        से महावीर स्वामी को मोक्ष की प्राप्ति की थी।


                                                     
                                                       महावीर का संघ 
         भगवान महावीर ने कैवल्य ज्ञान मार्ग को पुष्ट करने हेतु अपने अनुयायियों के चार भाग किए- मुनि,
         आर्यिका, श्रावक और श्राविका।
         प्रथम दो वर्ग गृहत्यागी परिव्राजकों के लिए बनाया और अंतिम दो गृहस्थों के लिए बनाया।
         यही भगवान महावीर का चतुर्विध-संघ कहलाया ।