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Friday, April 24, 2020

विश्व मलेरिया दिवस

राष्ट्रीय-मलेरिया-दिवस,Rashtriya malaria divas
मलेरिया दिवस

                                                      * विश्व मलेरिया दिवस *
     विश्व मलेरिया दिवस हम 25 अप्रैल को मनाते है, मलेरिया दिवस मनाने का मुख्य उदेश्य यह जानना है की
     मलेरिया के नियंत्रण हेतु किस प्रकार के विश्व स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं।
    मलेरिया मच्छरों के कारण फैलने वाली बीमारी है जिसके कारण हर वर्ष हजारो लोग अपनी जान दे देते हैं।
   " प्रोटोजुअन प्लाज्‍मोडियम " नामक कीटाणु मादा एनोफिलीज मच्छर से मलेरिया फैलता है । पूरे विश्व की
    कुल जनसंख्या में लगभग 106 देश ऐसे हैं जिनको मलेरिया का खतरा है वर्ष 2012 में मलेरिया के कारण
    लगभग 6,27,000 मृत्यु हुई जिनमें से अधिकांश अफ्रीकी, एशियाई, लैटिन अमेरिकी बच्चे शामिल थे |
    मादा एनोफिलीज मच्छर जिस से मलेरिया फैलता है इसका प्रभाव कुछ प्रतिशत तक मध्य पूर्व तथा कुछ
    यूरोप के भागों में भी देखने को । विश्व मलेरिया दिवस ऐसी 8 आधिकारिक वैश्विक सामुदायिक स्वास्थ्य
    अभियानों में से एक हैं, जिसे WHO( विश्व स्वास्थ्य संगठन ) द्वारा चिन्हित किया गया,इन वैश्विक
    सामुदायिक स्वास्थ्य अभियानों में विश्व स्वास्थ्य दिवस, विश्व रक्तदाता दिवस, विश्व टीकाकरण सप्ताह,
    विश्व तपेदिक दिवस, विश्व तंबाकू निषेध दिवस, विश्व हेपेटाइटिस दिवस एवं विश्व एड्स दिवस शामिल हैं ।


                                                 
                                            आखिर मलेरिया होता कैसे है ?

    केवल मलेरिया के रोगाणु का वाहक मादा मच्छर है, क्योंकि रोगाणु मच्छर के शरीर में एक परजीवी की तरह
    फैलता है और मच्छर जब किसी मनुष्य को कटता है तो लार के साथ मनुष्य के शरीर में परिविष्ट हो जाता
    है । रोगाणु एक कोषीय होता है जिसेको प्लास्मोडियम कहते है, रोगाणुओ की क़िस्म के अनुसार मलेरिया के
    तीन प्रकार होते हैं :-
    1. मलेरिया टर्शियाना 
    2. क्वार्टाना 
    3. ट्रोपिका
    इन सब मे सबसे अधिक जहरीला मलेरिया ट्रोपिका होता है, जो पी.फ़ाल्सिपेरम नामक रोगाणु से फैलता है
    और इसी रोगाणु के कारण हर साल भारत में भी मलेरिया फैलता है ।


                                     * मलेरिया के लक्षण *

   मलेरिया का संक्रमण होने और फैलने में लगभग 1 सप्ताह से 1 महीने का समय भी लग सकता हैं।
   मलेरिया के शुरुवाती लक्षणों की हम बात करे तो इसमे सर्दी-जुकाम या पेट की गड़बड़ी के लक्षण दिखाई दे
   सकते हैं , लेकिन ये मेलरिया की शुरुवात की पहली सिड्डी होती है, जिससे यह कहना मुश्किल है कि मेलरिया
   हुआ है या नही हुआ । लगभग एक सप्ताह बीत जाने के बाद सिर, शरीर और जोड़ों में दर्द, ठंड लग कर बुख़ार
   आना, नब्ज़ तेज़ हो जाना, खाना खाने का मन ना होना , उल्टी या पतले दस्त होना जैसे लक्षण दिखाई देने
   लगते है। मलेरिया की सबसे खतरनाक स्थिति तब मानी जाती है जब बुखार अचानक से बढ़ कर 3-4 घंटे
   रहता है और अचानक चढ़ता और उतर जाता है |



                                                   * एक नजर इतिहास पर *

    विश्व मलेरिया दिवस की स्थापना मई ,2007 में 60 वे विश्व स्वास्थ्य सभा के सत्र के दौरान की गई।
    विश्व मलेरिया दिवस की स्थापना से पहले 25 अप्रैल, 2001 से मनाए जाने वाले अफ्रीका मलेरिया दिवस के
    एक वर्ष पश्चात ऐतिहासिक अबुजा घोषणा में 44 मलेरिया ग्रसित देशों ने अफ्रीकी शिखर सम्मेलन मे
    हस्ताक्षर किए |


                                                        * अनमोल विचार *

  1.   " रखना है अपनी गली मोहले की सफाई तभी तो मलेरिया पर जीत
          होगी मेरे भाई " |
  2.  " मलेरिया छु भी नहीं पाएगा , जो तुम  नाली गंदे पानी की समय पर
         सफाई करवाएगा " |
  3.  " मै भी सुरक्षित रहूँगा औरों को भी रखूँगा,कोई करे या न करे मे अपने
         आस पास की सफाई खुद करूंगा " |
  4.  " मलेरिया होगा बड़ा विद्वान,मैंने भी जान लिया है उस से लड़ने का
        समाधान "|
  5.  " आओ मिलकर मलेरिया को भगाए,खुद को भी बचाए देश को भी
          बचाए " |
  6.  " बारिश के पानी को व्यर्थ इकट्टा होने नहीं देना,मच्छर का घर अपने
        यहा बनने न देना ,मलेरिया से बचना है क्यौकी ये जानलेवा होता 
        है  " |

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