“Live as if you were to die tomorrow. Learn as if you were to live forever.”

"जिस दिन आपके सामने कोई समस्या न आये उस दिन आप यकीन कर सकते है की आप गलत रास्ते पर जा रहे है"

“They cannot stop me. I will get my education, if it is in the home, school, or anyplace.”

“एक बेहतरीन किताब 100 अच्छे दोस्त के बराबर है, लेकिन एक सर्वश्रेष्ठ दोस्त पुस्तकालय के बराबर है।”

“Live as if you were to die tomorrow. Learn as if you were to live forever.”

"जिस दिन आपके सामने कोई समस्या न आये उस दिन आप यकीन कर सकते है की आप गलत रास्ते पर जा रहे है"

“Anyone who has never made a mistake has never tried anything new.”

“एक व्यक्ति ने कभी गलती नहीं की, जब उसने कभी भी कुछ नया करने की कोशिश नहीं की यानी जब हम कुछ नया करते है तभी गलतियां होना स्वाभाविक है।”

“Start where you are. Use what you have. Do what you can.”

ज्ञान ही शक्ति है। जानकारी स्वतंत्रता है। प्रत्येक परिवार और समाज में शिक्षा, प्रगति का आधार है।

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Friday, April 24, 2020

विश्व मलेरिया दिवस

राष्ट्रीय-मलेरिया-दिवस,Rashtriya malaria divas
मलेरिया दिवस

                                                      * विश्व मलेरिया दिवस *
     विश्व मलेरिया दिवस हम 25 अप्रैल को मनाते है, मलेरिया दिवस मनाने का मुख्य उदेश्य यह जानना है की
     मलेरिया के नियंत्रण हेतु किस प्रकार के विश्व स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं।
    मलेरिया मच्छरों के कारण फैलने वाली बीमारी है जिसके कारण हर वर्ष हजारो लोग अपनी जान दे देते हैं।
   " प्रोटोजुअन प्लाज्‍मोडियम " नामक कीटाणु मादा एनोफिलीज मच्छर से मलेरिया फैलता है । पूरे विश्व की
    कुल जनसंख्या में लगभग 106 देश ऐसे हैं जिनको मलेरिया का खतरा है वर्ष 2012 में मलेरिया के कारण
    लगभग 6,27,000 मृत्यु हुई जिनमें से अधिकांश अफ्रीकी, एशियाई, लैटिन अमेरिकी बच्चे शामिल थे |
    मादा एनोफिलीज मच्छर जिस से मलेरिया फैलता है इसका प्रभाव कुछ प्रतिशत तक मध्य पूर्व तथा कुछ
    यूरोप के भागों में भी देखने को । विश्व मलेरिया दिवस ऐसी 8 आधिकारिक वैश्विक सामुदायिक स्वास्थ्य
    अभियानों में से एक हैं, जिसे WHO( विश्व स्वास्थ्य संगठन ) द्वारा चिन्हित किया गया,इन वैश्विक
    सामुदायिक स्वास्थ्य अभियानों में विश्व स्वास्थ्य दिवस, विश्व रक्तदाता दिवस, विश्व टीकाकरण सप्ताह,
    विश्व तपेदिक दिवस, विश्व तंबाकू निषेध दिवस, विश्व हेपेटाइटिस दिवस एवं विश्व एड्स दिवस शामिल हैं ।


                                                 
                                            आखिर मलेरिया होता कैसे है ?

    केवल मलेरिया के रोगाणु का वाहक मादा मच्छर है, क्योंकि रोगाणु मच्छर के शरीर में एक परजीवी की तरह
    फैलता है और मच्छर जब किसी मनुष्य को कटता है तो लार के साथ मनुष्य के शरीर में परिविष्ट हो जाता
    है । रोगाणु एक कोषीय होता है जिसेको प्लास्मोडियम कहते है, रोगाणुओ की क़िस्म के अनुसार मलेरिया के
    तीन प्रकार होते हैं :-
    1. मलेरिया टर्शियाना 
    2. क्वार्टाना 
    3. ट्रोपिका
    इन सब मे सबसे अधिक जहरीला मलेरिया ट्रोपिका होता है, जो पी.फ़ाल्सिपेरम नामक रोगाणु से फैलता है
    और इसी रोगाणु के कारण हर साल भारत में भी मलेरिया फैलता है ।


                                     * मलेरिया के लक्षण *

   मलेरिया का संक्रमण होने और फैलने में लगभग 1 सप्ताह से 1 महीने का समय भी लग सकता हैं।
   मलेरिया के शुरुवाती लक्षणों की हम बात करे तो इसमे सर्दी-जुकाम या पेट की गड़बड़ी के लक्षण दिखाई दे
   सकते हैं , लेकिन ये मेलरिया की शुरुवात की पहली सिड्डी होती है, जिससे यह कहना मुश्किल है कि मेलरिया
   हुआ है या नही हुआ । लगभग एक सप्ताह बीत जाने के बाद सिर, शरीर और जोड़ों में दर्द, ठंड लग कर बुख़ार
   आना, नब्ज़ तेज़ हो जाना, खाना खाने का मन ना होना , उल्टी या पतले दस्त होना जैसे लक्षण दिखाई देने
   लगते है। मलेरिया की सबसे खतरनाक स्थिति तब मानी जाती है जब बुखार अचानक से बढ़ कर 3-4 घंटे
   रहता है और अचानक चढ़ता और उतर जाता है |



                                                   * एक नजर इतिहास पर *

    विश्व मलेरिया दिवस की स्थापना मई ,2007 में 60 वे विश्व स्वास्थ्य सभा के सत्र के दौरान की गई।
    विश्व मलेरिया दिवस की स्थापना से पहले 25 अप्रैल, 2001 से मनाए जाने वाले अफ्रीका मलेरिया दिवस के
    एक वर्ष पश्चात ऐतिहासिक अबुजा घोषणा में 44 मलेरिया ग्रसित देशों ने अफ्रीकी शिखर सम्मेलन मे
    हस्ताक्षर किए |


                                                        * अनमोल विचार *

  1.   " रखना है अपनी गली मोहले की सफाई तभी तो मलेरिया पर जीत
          होगी मेरे भाई " |
  2.  " मलेरिया छु भी नहीं पाएगा , जो तुम  नाली गंदे पानी की समय पर
         सफाई करवाएगा " |
  3.  " मै भी सुरक्षित रहूँगा औरों को भी रखूँगा,कोई करे या न करे मे अपने
         आस पास की सफाई खुद करूंगा " |
  4.  " मलेरिया होगा बड़ा विद्वान,मैंने भी जान लिया है उस से लड़ने का
        समाधान "|
  5.  " आओ मिलकर मलेरिया को भगाए,खुद को भी बचाए देश को भी
          बचाए " |
  6.  " बारिश के पानी को व्यर्थ इकट्टा होने नहीं देना,मच्छर का घर अपने
        यहा बनने न देना ,मलेरिया से बचना है क्यौकी ये जानलेवा होता 
        है  " |

विश्व धरोहर दिवस

विश्व-धरोहर-दिवस
                                                         
                                                          विश्व धरोहर दिवस 
विश्व धरोहर दिवस  (World Heritage Day) प्रतिवर्ष 18 अप्रैल  को मनाया जाता है |
इस दिवस को मनाने का मुख्य उद्देश्य भी यह है कि पूरे विश्व में मानव सभ्यता से जुड़े ऐतिहासिक और सांस्कृतिक स्थलों के संरक्षण के प्रति जागरूक किया जा सके सके |
संयुक्त राष्ट्र की संस्था यूनेस्को की पहल पर एक अंतर्राष्ट्रीय संधि की गई ज्योति विश्व के सांस्कृतिक प्राकृतिक धरोहर के संरक्षण के हेतु प्रतिबद्ध है |
यह संधि सन 1972 में लागू की गई प्रारंभ में मुख्यता तीन श्रेणियों में धरोहर स्थलों को शामिल किया गया तहरी वह धरोहर स्थल जो प्राकृतिक रूप से संबद्ध हो
अर्थात प्राकृतिक धरोहर स्थल दूसरे सांस्कृतिक धरोहर स्थल और तीसरा मिश्रित धरोहर स्थल वर्ष 1982 में इकोमार्क नामक संस्था ने ट्यूनिशिया में अंतर्राष्ट्रीय स्मारक
 और स्थल दिवस का आयोजन किया तथा उस सम्मेलन में यह भी बात उठी कि विश्व भर में किसी प्रकार के दिवस का आयोजन किया जाना चाहिए यूनेस्को की महासम्मेलन में इसके अनुमोदन के पश्चात 18 अप्रैल को विश्व धरोहर दिवस के रूप में मनाने के लिए घोषणा की गई पूर्व में 18 अप्रैल को विश्व स्मारक तथा पुरातत्व स्थल दिवस के रूप में मनाए जाने की परंपरा थी |
                          
                             * भारत के विश्व धरोहर स्थल *
युनेस्को विश्व विरासत स्थल  उन खास स्थानों (जिनमें वन क्षेत्र, पर्वत, झील, मरुस्थल, स्मारक, भवन, या शहर इत्यादि) को कहा जाता है, जो विश्व विरासत स्थल समिति द्वारा चयनित होते हैं | यही समिति इन स्थलों की देखरेख युनेस्को की अंतर्गत  करती है।
इस कार्यक्रम का उद्देश्य विश्व के ऐसे स्थलों को चयनित एवं संरक्षित करना होता है ,जो विश्व संस्कृति की दृष्टि से मानवता के लिए महत्वपूर्ण हैं। कुछ खास परिस्थितियों में ऐसे स्थलों को इस समिति द्वारा आर्थिक सहायता भी दी जाती है। 
अब तक (जुलाई 2019 तक) पूरी दुनिया में लगभग 1121 स्थलों को विश्व विरासत स्थल घोषित किया जा चुका है ,जिसमें 869 सांस्कृतिक, 213 प्राकृतिक, 39 मिले-जुले और 138 अन्य स्थल हैं।
                     ---अभी तक भारत में 39 विश्व विरासत स्थल है ---

यूनेस्को द्वारा विश्व विरासत घोषित किए गए भारत में स्थित सांस्‍कृतिक और प्राकृतिक स्‍थलों की विश्व विरासत स्थल सूची |
                                                    * धरोहर सूची *


  1. अजंता गुफाएँ                                                   औरंगाबाद, महाराष्ट्र
  2. आगरा का किला                                               आगरा, उत्तर प्रदेश
  3. ताज महल                                                        आगरा, उत्तर प्रदेश
  4. एलोरा गुफाएं                                                     महाराष्ट्र
  5. कोणार्क सूर्य मंदिर                                             ओडिशा
  6. महाबलिपुरम के स्मारक समुह                           तमिलनाडु
  7. केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान                                   राजस्थान
  8. काज़ीरंगा राष्ट्रीय उद्यान                                    असम
  9. मानस राष्ट्रीय उद्यान                                         असम
 10. गोवा के गिरजाघर एवं कॉन्वेंट                             गोवा
 11. हम्पी                                                                  कर्नाटक
 12. फतेहपुर सीकरी                                                   उत्तर प्रदेश
 13. खजुराहो स्मारक समूह                                        मध्य प्रदेश
 14. सुंदरवन राष्ट्रीय उद्यान                                      पश्चिम बंगाल
 15. एलिफेंटा की गुफाएँ                                              महाराष्ट्र
 16. पत्तदकल                                                           कर्नाटक
 17. महान चोल मंदिर                                                 तमिलनाडु
 18. नन्दा देवी राष्ट्रीय उद्यान एवं फूलों की घाटी          उत्तराखण्ड
 19. साँची के बौद्ध स्तूप                                               मध्य प्रदेश
 20. हुमायूँ का मकबरा                                                 दिल्ली
 21. कुतुब मीनार एवं अन्य स्मारक                             दिल्ली
 22. भारतीय पर्वतीय रेल,                                            दार्जिलिंग
 23. बोधगया का महाबोधि विहार                                 बिहार
 24. भीमबेटका शैलाश्रय                                              मध्य प्रदेश
 25. चंपानेर-पावागढ़ पुरातत्व उद्यान                          गुजरात
 26. छत्रपति शिवाजी टर्मिनस                                       महाराष्ट्र
 27. दिल्ली का लाल किला                                           राजस्थान
 28. पश्चिमी घाट                                                         महाराष्ट्र, गोवा, कर्नाटक, तमिलनाडु और केरल
 29. राजस्थान के पहाड़ी दुर्ग                                         राजस्थान ( राजस्थान के पहाड़ी दुर्ग, राजस्थान की 
                                                                                   अरावली पर्वतमाला में स्थित विभिन्न स्थलों की 
                                                                                   श्रंखला है।
                                                                                   वे एक राजपूती सैन्य पहाड़ी स्थापत्य-कला का नमूना
                                                                                    पेश  करते हैं,  जिनकी पहचान उनके पहाड़ी शिखरों
                                                                                    पर स्थित होने, वहां के भौगोलिक स्थिति का  
                                                                                   रक्षात्मक उपयोग करने से होती हरा जस्थान के ये
                                                                                   दुर्ग, व्यापक श्रृंखला के भौगोलिक एवं सांस्कृतिक 
                                                                                   क्षेत्रों में स्थित मजबूत राजपूत सैन्य शक्ति का 
                                                                                   प्रतिनिधित्व करते हैं | इन दुर्गों से राजपूत
                                                                                   रक्षात्मक वास्तुकला के विकास का अंदाज़ा लगाया जा
                                                                                   सकता है तथा ये राजपूत सैन्य  वास्तुकला  के
                                                                                   उदाहरण हैं।  राजपूत दुर्ग अपने बेमिसाल स्थापत्य 
                                                                                    कला के लिए प्रसिद्ध  हैं। अक्सर, उनकी सीमा मे कई  
                                                                                    बड़े क्षेत्र, यहां तक कि कई गांव भी ,सुरक्षा 
                                                                                     दीवारों के भीतर आ जाते हैं। इन दुर्गों में  चित्तौड़ 
                                                                                     दुर्ग,   कुंभलगढ़ दुर्ग, रणथंभौर दुर्ग, गागरोन
                                                                                     दुर्ग, आमेर दुर्ग तथा जैसलमेर दुर्ग आते हैं। इन
                                                                                     किलों  के परिसरों में महल, हिंदू और जैन मंदिर,  
                                                                                     शहरी केंद्र और व्यापारिक केंद्र शामिल हैं। )
 30. ग्रेट हिमालयन राष्ट्रीय उद्यान                               हिमाचल प्रदेश
 31. रानी की वाव                                                            गुजरात
 32. नालन्दा महाविहार (नालंदा विश्वविद्यालय)             बिहार ( बिहार में नालंदा पुरातत्व साइट सीखने का
                                                                                     एक केंद्र और 13 वीं सदी के लिए 3 शताब्दी ईसा पूर्व
                                                                                     से एक बौद्ध मठ था |
 33. कंचनजंगा राष्ट्रीय उद्यान                                      सिक्किम ( भारत में स्थित एक राष्ट्रीय उद्यान
                                                                            और  एक बायोस्फीयर रिज़र्व है |
 34. ली कोर्बुज़िए के वास्तुशिल्प                                      चंडीगढ़ ( चंडीगढ़ की राजधानी परिसर सहित कई 
                                                                                       देशों भर ली कोर्बुज़िए के  वास्तुशिल्प काम 
                                                                                       आधुनिक आंदोलन के लिए उत्कृष्ट योगदान के 
                                                                                       हिस्से के रूप में एक विश्व विरासत स्थल के रूप में
                                                                                        मान्यता दी गई थी |
 35. अहमदाबाद का ऐतिहासिक शहर                                 गुजरात गुजरात ( 606 साल पुरानी सिटी 
                                                                                        अहमदाबाद  अब विश्व धरोहर सिटी के नाम 
                                                                                        से जानी  जाएगी |
 36. मुंबई का विक्टोरियन और आर्ट डेको एनसेंबल             मुंबई  ( भारत के
                                                                               ‘मुंबई के विक्टोरियन गोथिक  एवं  आर्ट डेको इंसेबल्स‘ 
                                                                                        को यूनेस्को की विश्व 
                                                                                        धरोहर  संपदा की सूची में अंकित किया गया | 
                                                                                        यह निर्णय बहरीन के मनामा में यूनेस्को की विश्व
                                                                                        धरोहर समिति के 42वें सत्र में लिया गया।
 37. गुलाबी शहर                                                             2019 जयपुर ( यूनेस्को ने शनिवार दोपहर ट्वीट
                                                                                        किया, भारत के राजस्थान में  जयपुर शहर को 
                                                                                        यूनेस्को  के विश्व धरोहर स्थल के तौर पर चिन्हित
                                                                                         किया गया  (अजरबैजान) में 30 जून से 10 जुलाई 
                                                                                         तक यूनेस्को की विश्व धरोहर कमेटी के 43 वें सत्र 
                                                                                         के बाद इसकी घोषणा की गयी |

38. जंतर मंतर, जयपुर                                                    राजस्थान


                     यूनेस्को की विश्व धरोहर समिति के सदस्य
  सदस्य राष्ट्र                            सत्र
 अंगोला                           2015-2019
 अज़रबैजान                    2015-2019
 बुर्किना फासो                  2015-2019
 क्रोएशिया                       2013-2017
 क्यूबा                             2015-2019
 फ़िनलैंड                          2013-2017
 इंडोनेशिया                      2015-2019
 जमैका                            2013-2017
 कजाखस्तान                   2013-2017
 कुवैत                               2015-2019
 लेबनान                           2013-2017
 पेरू                                  2013-2017
 फिलीपींस                         2013-2017
 पोलैंड                               2013-2017
 पुर्तगाल                            2013-2017
 कोरिया गणराज्य              2013-2017
 ट्यूनीशिया                       2015-2019
 तुर्की                                 2013-2017
 तंजानिया                         2015-2019
 वियतनाम                        2013-2017
 जिम्बाब्वे                         2015-2019

             कुल  = 21


Wednesday, April 22, 2020

भारतीय रेलवे दिवस

                                      
भारतीय रेल्वे दिवस,भारतीय रेल का विश्व में कौनसा स्थान है,indian railways
INDIAN RAILWAY
     
                               भारतीय रेलवे दिवस
   भारतीय रेलवे दिवस 16 अप्रैल को मनाया जाता है क्योकि आज के दिन 16 अप्रैल 1853 को भारत मे
    सर्वप्रथम रेल को चलाया गया था | जो की मुंबई से ठाने की बीच चलाई गई थी जिसकी कुल यात्रा 34
    किलोमीटर थी | आज 16 अप्रैल 2020 को भारतीय रेलवे को 167 साल पूरे हो गए है |
    इस रेल मे 14 डिब्बे जिसे 21 तोपों की सलामी दी गई थी और इसमें 400 यात्रियों ने यात्रा की थी।
    पहली रेल को तीन लोकोमोटिव सिंधु, साहिब और सुल्तान ने खींचा था।

   भारतीय रेल एशिया का दूसरा सबसे बड़ा रेल नेटवर्क है साथ ही एकल सरकारी स्वामित्व वाला विश्व का
  चौथा सबसे बड़ा रेल नेटवर्क भारतीय रेल है |

         

                                                  भारतीय रेलवे के मुख्य खंड 

   भारतीय रेल के दो मुख्य खंड है - माल वाहन और सवारी |माल खंड से लगभग दो तिहाई राजस्व आता है और
   बाकी सवारी यातायात से आता है | माल खंड के थोक यातायात का लगभग 95 % के आस-पास है जो ज्यादा
   कोयले से आता है |


                                                  भारत मे रेल की शुरुवात
    सन् 1848 में बम्बई में ग्रेट इण्डियन पेनिनसुला रेलवे कम्पनी की स्थापना की गई थी |
    सन् 1850 में इसी कम्पनी ने बम्बई से थाणे तक रेल लाइन बिछाने का कार्य प्रारम्भ किया गया था |
    आज भारतीय रेलवे बहुत बड़े भाग मे फेल चुका है |
    आज भारतीय रेल मार्ग की लंबाई लगभग 1,15,000 किलोमीटर  है जो की 7172 रेलवे स्टेशनो जुड़ा हुआ है |
    भारतीय रेलवे को 17  जोन्स में विभाजित किया गया है।
    हर जोन में रेलमंडल बनाए गये हैं, भारत में अभी कुल 67 रेलमंडल है जो उपरोक्त 18 जोन के अंदर कार्य
     करते हैं।
 

                                        उपलब्धियाँ

1.   दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे जो पतली गेज की एक बहुत पुरानी रेल व्यवस्था है उसे यूनेस्को द्वारा विश्व
      विरासत घोषित किया गया है। दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे जो पतली गेज की एक बहुत पुरानी रेल
      व्यवस्था है उसे यूनेस्को द्वारा विश्व विरासत घोषित किया गया है।
2.  लाइफ लाईन एक्सप्रेस भारतीय रेल की चलने वाला अस्पताल सेवा जो दुर्घटनाओं एवं अन्य स्थितियों में
      प्रयोग की जाती है।
3.   नीलगिरि पर्वतीय रेल को भी विश्व विरासत मे शामिल किया गया है।
4.   कोंकण रेलवे
5.   थार एक्सप्रेस
6.   पैलेस आन व्हील्स
7.   राजधानी एक्सप्रेस
8.   समझौता एक्सप्रेस
9.   शताब्दी एक्सप्रेस

                                                     
                                                       रेलवे प्रशिक्षण केंद्र
1.    इंडियन रेलवे इंस्टीट्यूट ऑफ इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग, नासिक।
2.    इंडियन रेलवे इंस्टीट्यूट ऑफ सिग्नल इंजीनियरिंग एंड हेली कम्यूनिकेशन, सिकंदराबाद।
3.    रेलवे स्टाफ कालेज, बड़ौदा
4.    इंडियन रेलवे इंस्टीट्यूट ऑफ मेकेनिकल एंड इलिक्ट्रोनिक, इंजीनियरिंग, जमालपुर।
5.    इंडियन रेलवे इंस्टीट्यूट ऑफ सिविल इंजीनियरिंग, पुणे


                                                      ईंजन निर्माण केंद्र
1.  डीजल लोकोमोटिव वर्क्स, वाराणसी (डीजल इंजन)
2.  भारत हैवी इलेक्ट्रिकल लिमिटेड, भोपाल (डीजल इंजन)
3.  टाटा इंजीनियरिंग एंड लोकोमोटिव कम्पनी लिमिटेड, चितरंजन (डीजल इंजन)
4.  रेल ईंजन निर्माण केंद्र
5.  डीजल कम्पोनेट वर्क्स, पटियाला (डीजल इंजन के पूर्जे)
6.  डीजल लोकोमोटिव कंपनी, जमशेदपुर (डीजल इंजन)
7.  चितरंजन लोकोमोटिव वर्क्स, चितरंजन (विद्युत इंजन)


                                                    डिब्बे का निर्माण केंद्र

1.   व्हील एंड एक्सेल, बेंगलुरु (कर्नाटक)
2.   चितरंजन लोकोमोटिव वर्क्स, चितरंजन
3.   भारत अर्थमूवर्स लिमिटेड बेंगलुरु (कर्नाटक)
4.   रेल कोच फैक्ट्री, कपूरथला (पंजाब) बी.जी. डिब्बा निर्माण
5.   जेसफ़ एंड कंपनी लिमिटेड, कोलकाता (पं.बंगाल)
6.   इंटीग्रल कोच फैक्ट्री पैराम्बूर (चेन्नई) बी.जी.डिब्बा निर्माण








भगवान महावीर

महावीर जयंती,महावीर स्वामी के सिद्धांत,bhagwan mahavir jayanti
                                                                                  भगवान महावीर
                                                        भगवान महावीर 
        भगवान महावीर स्वामी का जन्म 599 वर्ष पूर्व (ईसा से ) कुंडग्राम (बिहार),भारत मे हुआ । जैन धर्म के
        24 वें तीर्थंकरभगवान महावीर हुये | वर्तमान में वैशाली (बिहार) के वासोकुण्ड को यह स्थान है। 23वें
        तीर्थंकर पार्श्वनाथ जी के निर्वाण (मोक्ष) प्राप्त करने के 188 वर्ष बाद इनका जन्म हुआ था | 
        महावीर जयंती जैन समुदाय का सबसे बड़ा पर्व माना जाता है।
     
        जैन ग्रंथों के अनुसार चैत्र शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी को जैन समाज के अंतिम तीर्थंकर भगवान महावीर का
        जन्म हुआ था, जिस कारण जैन धर्म के लोग इस दिन को उनके जन्मदिवस के रूप में मनाते हैं |

       भगवान महावीर ने दुनिया को अहिंसा परमो धर्म का संदेश दिया | भगवान महावीर को बचपन मे वर्धमान
       नाम से जाना जाता था | इनका जन्म लिच्छ्हवी वंश के महाराज सिद्धार्थ व महारानी त्रिशला के हुआ
       भगवान महावीर ने ज्ञान प्राप्ति के लिए 30 साल की उम्र में राजमहलो के सुखो को छोड़ दिया |
       भगवान महावीर ने तपोमय साधना का रास्ता चुना और 12 वर्षो का कठोर तप कर अपनी इंद्रियो
       को जीत लिया |

                                                                    सिद्धांत
       भगवान महावीर ने अहिंसा परमो धर्म के सिद्धांत पर ज़ोर दिया और भगवान महावीर ने अपने अनुयायीयो
       को अहिंसा,सत्य,अस्तेय,अपरिगृह और ब्रह्मचर्य पंच वर्तो का पालन करना जरूरी बताया है | अहिंसा ही
       सुख शांति देने वाली है,यही मानव का सच्चा धर्म और कर्म है |

                                                                     पंच व्रत

1.     सत्य ―  भगवान महावीर स्वामी सत्य के बारे बताया हैं की - " हे पुरुष ! सत्य ही सच्चा तत्व है ।
                       जो बुद्धिमान सत्य को जान लेता है, वह मृत्यु को भी तैरकर पार कर लेता है।

2.     अहिंसा – " इस संसार में जितने भी एक, दो, तीन, चार और पाँच इंद्रीयों वाले जीव है |
                         उनकी हिंसा मत करो, उनको उनके रास्ते पर जाने से मत रोको । इन सब के लिए अपने मन
                         में दया का भाव रखो । इनकी रक्षा करो । यही अहिंसा का संदेश भगवान महावीर अपने
                         उपदेशों दिया हैं। "

3.     अचौर्य -   " जब तक कोई अपनी वस्तु स्वंम न दे, बिना उसके दिए कोई ग्रहण करता है तो उसे जैन ग्रंथों
                          में चोरी कहा गया है "।

4.    अपरिग्रह – " अपरिग्रह पर भगवान महावीर कहना हैं की जो खुद सजीव या निर्जीव वस्तुओ का संग्रह
                           करता है, दूसरों से इस प्रकार का संग्रह कराता है या किसी को ऐसा संग्रह करने की सम्मति
                           देता है, उसे दुःखों से कभी छुटकारा नहीं मिल पाएगा । ये संदेश अपरिग्रह के द्वारा
                           भगवान महावीर ने दुनिया को दिया हैं ।"

5.   ब्रह्मचर्य-     " भगवान महावीर स्वामी ब्रह्मचर्य के बारे में बहुत ही अमूल्य उपदेश देते हैं कि ब्रह्मचर्य
                            उत्तम तपस्या, नियम, ज्ञान, दर्शन, चारित्र, संयम और विनय की मूल जड़ है । तपस्या में                                ब्रह्मचर्य श्रेष्ठ तपस्या है । जो पुरुष स्त्रियों से संबंध नहीं रखते, वे मोक्ष मार्ग की ओर
                            बढ़ते हैं। "

                                                                      धर्म
             जैन ग्रंथों में दस धर्म का वर्णन पाया जाता है । पर्युषण पर्व, जिन्हें दस लक्षण भी कहा जाता है,
             पर्युषण पर्व के समय दस दिन इन दस धर्मों का चिंतन किया जाता है।
             धर्म सबसे अधिक मंगल है। अहिंसा, संयम और तप धर्म के रूप है। भगवान महावीर ने कहा की- " जो
           धर्मात्मा है, जिसके मन में सदैव धर्म रहता है, उसे देवता भी नमन करते हैं।
           भगवान महावीर ने अपने प्रवचनों में धर्म, सत्य, अहिंसा, ब्रह्मचर्य और अपरिग्रह, क्षमा पर अत्यधि
 जोर दिया । त्याग,करुणा,प्रेम,संयम,शील और सदाचार ही उनके प्रवचनों का मूल है ।"


                                                                      क्षमा
             क्षमा के बारे में भगवान महावीर बताते हैं की - " मैं सब जीवों से क्षमा चाहता हूँ । जगत के सभी जीवों
             के प्रति मेरा मैत्रीभाव है । मेरा किसी से वैर नहीं है । मैं सच्चे हृदय से धर्म में स्थिर हुआ हूँ । सब जीवों
             से मैं सारे अपराधों की क्षमा माँगता हूँ । सब जीवों ने मेरे प्रति जो अपराध किए हैं, उन्हें मैं क्षमा
             करता हूँ ।"

            भगवान महावीर ने बताया है की- " मैंने अपने मन में जिन-जिन पाप की वृत्तियों का संकल्प किया
            हो, वचन से जो-जो पाप वृत्तियाँ प्रकट की हों और शरीर से जो-जो पापवृत्तियाँ की हों, मेरी वे सभी
            पापवृत्तियाँ विफल हों । मेरे वे सारे पाप मिथ्या हों ।"


                                                                  मोक्ष
        भगवान महावीर ने ईसापूर्व 527, 72 वर्ष की आयु में बिहार के पावापुरी में कार्तिक कृष्ण अमावस्या को
        मोक्ष प्राप्ति की । पावापुरी में एक जल मंदिर स्थित है जिसके बारे में कहा जाता है कि ये वो स्थान है जहाँ
        से महावीर स्वामी को मोक्ष की प्राप्ति की थी।


                                                     
                                                       महावीर का संघ 
         भगवान महावीर ने कैवल्य ज्ञान मार्ग को पुष्ट करने हेतु अपने अनुयायियों के चार भाग किए- मुनि,
         आर्यिका, श्रावक और श्राविका।
         प्रथम दो वर्ग गृहत्यागी परिव्राजकों के लिए बनाया और अंतिम दो गृहस्थों के लिए बनाया।
         यही भगवान महावीर का चतुर्विध-संघ कहलाया ।

गुरु- नानक देव




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गुरु-नानक-देव


                                                          गुरु नानक देव 

 गुरु नानक का जन्म कार्तिक पूर्णिमा को (खत्री कुल मे ) 15 अप्रैल 1469 में राय भोई की तलवंडी जो की,
 अब ननकाना साहिब,पंजाब पाकिस्तान मे हुआ |
 गुरु नानक को मानने वाले गुरुनानक को नानक,बाबा नानक नानकशाह अनेक नामो से जानते है |
 गुरु नानक दर्शिनीक,धर्म सुधारक,कवि,देश भक्त,योगी थे |
 नानक साहब के पिता का नाम मेहता कालूचंद खत्री तथा माता जी का नाम तृप्ता देवी था ।
 गुरु नानक सिख संप्रदाय के पहले गुरु हैं और अंतिम गुरु गोबिंद सिंह है| सिखों के कुल दस गुरु है |

                                                                      दर्शन
 इनके उपदेश का मूल यही था कि ईश्वर एक है और उनकी उपासना हिंदू मुसलमान दोनों के लिये हैं ।

                                                                  कविताएं
नानक अच्छे सूफी कवि भी हुआ करते थे । उनके भावुक और कोमल हृदय ने प्रकृति से एकात्म होकर
जो अभिव्यक्ति की है, वह निराली है।
उनकी भाषा "बहता नीर" थी जिसमें फारसी, मुल्तानी, पंजाबी, सिंधी, खड़ी बोली,
अरबी के शब्द समा गए थे।

                                                                    रचनाएँ
 गुरु ग्रन्थ साहिब में सम्मिलित 974 शब्द (19 रागों में), गुरबाणी में शामिल है- जपजी, सिद्ध
 गोहस्ट, सोहिला, दखनी ओंकार, आसा दी वार, पट्टी, बारह माह

                                                                     मृत्यु
 गुरु नानक साहब की मृत्यु 22 सितंबर 1539 मे करतारपुर मे हुआ, जो कि अब पाकिस्तान में है|
 करतारपुर नगर गुरु नानक ने बसाया था जहाँ बाबा साहब ने
 एक बड़ी धर्मशाला भी वहा बनवाई थी |

                                                                       शिक्षा
 गुरु नानक साहब का पढ़ने - लिखने मे मन नहीं लगता था | 8 साल की उम्र में उन्होने स्कूल छोड़ दिया,क्योंकि
 भगवत्प्राप्ति के संबंध में इनके प्रश्नों के आगे अध्यापकों ने हार मान ली और अध्यापको ने सम्मान  के साथ  गुरु साहब को घर छोड़ दिया |


                                           अनमोल विचार गुरु नानक साहब 

 अपने घर में शांति से निवास करने वालों का यमदूत भी बाल बांका नहीं कर सकता
                                                                                                                      — गुरु नानक देव
 धार्मिक वही है जो सभी लोगों का समान रूप से सम्मान करे.
                                                                                                                      — गुरु नानक देव
 केवल वही बोलो जो आपको सम्मान दिलाये.
                                                                                                                      — गुरु नानक देव
                                              प्रेरक कहानियां गुरु साहब
1.   जब नानक देव 12 वर्ष के थे | उनके पिता ने उन्हें 20 रूपए दिए और अपना एक व्यापर शुरू करने  के लिए
         कहा,क्यौकी उनके पिता चाहते थे की वे व्यापर के विषय में कुछ जान सकें | गुरु नानक देव ने 20  रूपये
         गरीबों व संतों को खाना  खिलाने में खर्च कर दिये | जब उनके पिता नें उनसे पुछा – तुम्हारे व्यापार का 
         क्या हुआ ?  तो उन्होंने उत्तर दिया –- मैंने उन पैसों का सच्चा सौदा कर लिया | जिस स्थान पर गुरु 
         नानक जी ने उन गरीबों व संतों को खाना खिलाया था, वहां सच्चा सौदा नाम का गुरुद्वारा स्थित है |
2.     एक बार गुरु साहब गंगा नदी के तट पर टहल रहे थे,तब उन्होंने देखा की कुछ लोग पानी के अन्दर खड़े  होकरसूर्य की और मुख कर के स्वर्ग में पूर्वजों की शांति के लिए पानी डाल रहे है | गुरु नानक देव से रहा   गया और वे भी पानी मे गए अपने दोनों हाथों से अपने राज्य पंजाब कीओर खड़े हो कर पानी डालने लगे|  जब लोगों ने यह देखा तो गुरु नानक को उनकी गलतीके बारे में समझाया और पुछा – ऐसा क्यों कर रहे हो, तो उन्होंने कहाँ – " अगर गंगा माता का पानी स्वर्ग में आपके पूर्वजों तक पहुँच सकता है, तो पंजाब में मेरे खेतों तक क्यों नहीं पहुँच सकता ? जबकि पंजाब तो स्वर्ग से नजदीक है |"


Thursday, April 16, 2020

अग्निशमन दिवस

                                                                अग्निशमन दिवस
अग्निशमन दिवस इन हिंदी,अग्निशमन अभ्यास
अग्निशमन दिवस
14 अप्रैल 1944 को हम अग्निशमन दिवस मनाते है | जिसकी वजह ये रही की 14 अप्रैल 1944 को मुंबई बंदरगाह पर एक माल ले जाने वाले जहाज में अचानक से आग लग गई, जहाज में काफी मात्रा में रुई, 
विस्फोटर एवं युद्ध उपकरण रखे हुए थे । 
आग पर काबू पाने की कोशिश में लगभग 66 अग्निशमन कार्यकर्ता आग की भेंट चढ़ वीर गति को प्राप्त हुए। 
इन्हीं दिवंगत 66  अग्निशमनकर्मियों की स्मृति में प्रत्येक वर्ष 14 अप्रैल को अग्निशमन दिवस के रूप में मनाते है ।
प्रति वर्ष अग्निशामक दिवस पर अनेक जागरुकता कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जिनमे आग से बचाव, सावधानियां और आग लगने पर ध्यान रखे जाने वाली बातों से लोगों को अवगत कराया जाता है। 
 अग्निशमन दिवस मनाने का प्रमुख उद्देश्य ही अग्निकांड को रोकने और बचाव के प्रति जागरुकता पैदा करना है। भारत में आज भी कई स्थानों पर लोग अग्निकांड और इनसे होने वाली दुर्घटनाओं के प्रति उतने सजग नहीं है। कई स्थानों पर अचानक आग लग जाने की स्थिति में बचाव के संसाधन नहीं जुट पाते, तो कहीं फायर ब्रिगेड के पहुंचने से पहले अग्निकांड से काफी नुकसान हो चुका होता है, यदि समय-समय पर व्यवस्थित रूप से जागरुकता अभियान चलाए जाएं, तो जान-माल को बचाया जा सकता है।

                                            *  बरते जाने वाली सावधानी *
- शहरी क्षेत्रों में बरते सावधानी
- घरों की वायरिंग की जांच कराकर उसे ठीक रखें
- कांप्लेक्स व मार्केट में पानी व बालू का इंतजाम करें
- परिसर से बाहर निकलने की व्यवस्था रखें
- रसोईं में काम खत्म होने के बाद रेगुलेटर की नाॅब बंद करना न भूलें
- गैस की गंध महसूस हो तो माचिस या बिजली न जलाएं
                                                    * यहाँ दे सूचना *
 -  फायर कंटोल रूम-101
 -  पुलिस कंटोल रूम-100

Wednesday, April 15, 2020

डॉ॰ बाबासाहब आम्बेडकर

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baba saheb ambedkar jayanti

                                     डॉ॰ बाबासाहब आम्बेडकर    
भीमराव रामजी आम्बेडकर का जन्म 14 अप्रैल, 1891 को ब्रिटिश भारत के मध्य भारत प्रांत (अब मध्य प्रदेश) में स्थित महू नगर सैन्य छावनी में हुआ | वे रामजी मालोजी सकपाल और भीमाबाई की 14 वीं व अंतिम संतान थे | उनका परिवार मराठी मूल का, कबीर पंथ को माननेवाला था | जो वर्तमान महाराष्ट्र के रत्नागिरी जिले में आंबडवे गाँव का निवासी थे, हिंदू महार जाति से संबंध रखते थे, जो तब अछूत कही जाती थी और इस कारण उन्हें सामाजिक और आर्थिक रूप से गहरा भेदभाव सहन करना पड़ा | भीमराव आम्बेडकर के पूर्वज लंबे समय से ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी की सेना में कार्यरत रहे और उनके पिता रामजी सकपाल, भारतीय सेना की महू छावनी में सेवारत थे तथा यहां काम करते हुये वे सुबेदार के पद को हासिल किया ।  आम्बेडकर जी ने मराठी और अंग्रेजी में औपचारिक शिक्षा प्राप्त की थी |
                                                       ----शिक्षा----
1.  भीमराव रामजी आम्बेडकर ने 1907 में,अपनी मैट्रिक परीक्षा उत्तीर्ण की और अगले वर्ष उन्होंने
      एल्फिंस्टन  कॉलेज में प्रवेश लिया,जो बॉम्बे  विश्वविद्यालय से संबद्ध था |
2.   1912 तक, उन्होंने बॉम्बे विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र और राजनीतिक विज्ञान में कला स्नातक
       (बी॰ए॰)  किया |
3.   1913 में संयुक्त राज्य अमेरिका गए जहां उन्हे न्यू यॉर्क शहर में कोलंबिया विश्वविद्यालय से
       स्नातकोत्तर शिक्षा प्राप्त की, जून 1915 में उन्होंने  अपनी कला स्नातकोत्तर (एम॰ए॰) परीक्षा पास की,
       जिसमें अर्थशास्त्र प्रमुख विषय, और समाजशास्त्र, इतिहास, दर्शनशास्त्र और मानव विज्ञान
       (अन्य   विषय )
4.  1916 में,दूसरा शोध कार्य, नेशनल डिविडेंड ऑफ इंडिया - ए हिस्टोरिक एंड एनालिटिकल स्टडी के लिए   
     दूसरी कला स्नातकोत्तर प्रदान की,
5.   1916 में तीसरे शोध कार्य इवोल्युशन ओफ प्रोविन्शिअल फिनान्स इन ब्रिटिश इंडिया के लिए
       अर्थशास्त्र में पीएचडी प्राप्त की |
6.   1921 में विज्ञान स्नातकोत्तर (एम॰एससी॰) की |
7.   1922, उन्हें ग्रेज इन ने बैरिस्टर-एट-लॉज डिग्री प्रदान की, उन्हें ब्रिटिश बार में बैरिस्टर के रूप में प्रवेश 
      मिल  गया। 1923 में,उन्होंने अर्थशास्त्र में  डी॰एससी॰ (डॉक्टर ऑफ साईंस) उपाधि ली |
8.   तीसरी और चौथी डॉक्टरेट्स(एलएल॰डी॰,कोलंबिया विश्वविद्यालय से 1952 और डी॰लिट॰,
       उस्मानिया  विश्वविद्यालय 1953 में सम्मानित उपाधि  मिली | )
9.   उन्होंने कोलंबिया विश्वविद्यालय और लंदन स्कूल ऑफ़ इकोनॉमिक्स दोनों ही विश्वविद्यालयों से
      अर्थशास्त्र में डॉक्टरेट उपाधियाँ प्राप्त कीं तथा विधि, अर्थशास्त्र और राजनीति विज्ञान में शोध कार्य किये |
      भीमराव रामजी आम्बेडकर ( बचपन मे भिवा ) जो की डॉ॰ बाबासाहब आम्बेडकर नाम से लोकप्रिय थे, 
      भारतीय बहुज्ञ, विधिवेत्ता, अर्थशास्त्री, राजनीतिज्ञ, और समाजसुधारक भी रहे |
      उन्होंने दलित बौद्ध आंदोलन को प्रेरित किया और दलितों से सामाजिक भेदभाव के विरुद्ध अभियान शुरू 
      किया, श्रमिकों, किसानों और महिलाओं के  अधिकारों का समर्थक रहे |
 
      1956 में उन्होंने बौद्ध धर्म अपना लिया। 1990 में, उन्हें भारत रत्न, भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान
       से मरणोपरांत सम्मानित किया गया ।
      14 अप्रैल को उनका जन्म दिवस आम्बेडकर जयंती एक पर्व के रूप में भारत समेत दुनिया भर में मनाया
       जाता है , भीमराव रामजी आम्बेडकर की विरासत में लोकप्रिय संस्कृति में कई स्मारक और चित्रण
       शामिल हैं |

                                         ------ धर्म परिवर्तन की घोषणा-----
      13 अक्टूबर 1935 को नासिक के निकट येवला में एक सम्मेलन में आम्बेडकर जी ने धर्म परिवर्तन करने
       की घोषणा की,14 अक्टूबर 1956 को   नागपुर शहर में डॉ॰ भीमराव आम्बेडकर ने खुद और उनके समर्थकों
       के लिए एक औपचारिक सार्वजनिक धर्मांतरण समारोह का आयोजन करवाया ।  प्रथम डॉ॰ आम्बेडकर ने
       अपनी पत्नी सविता एवं कुछ सहयोगियों के साथ भिक्षु महास्थवीर चंद्रमणी द्वारा पारंपरिक तरीके से   
       त्रिरत्न और पंचशील  को अपनाते हुये बौद्ध धर्म ग्रहण किया ।

     1948 से आम्बेडकर मधुमेह से पीड़ित थे और जून से अक्टूबर 1954 तक वो बहुत बीमार रहे इस दौरान 
     उनकी दृष्टि भी कमजोर होती  गई,राजनीतिक मुद्दों से परेशान आम्बेडकर का स्वास्थ्य अधिक खराब हो 
      गया और 1955 के दौरान किये गये लगातार काम ने उन्हें तोड़ कर रख दिया। अपनी अंतिम पांडुलिपि 
      भगवान बुद्ध और उनका धम्म को पूरा करने के तीन दिन के बाद 6 दिसम्बर 1956 को आम्बेडकर का
       महापरिनिर्वाण नींद में दिल्ली में उनके घर मे हो गया।
                                                               ----उपलब्धि----

     राज्य सभा के सदस्य, बॉम्बे राज्य (3 अप्रैल 1952 – 6 दिसम्बर 1956 )
     भारत के प्रथम क़ानून एवं न्याय मंत्री (15 अगस्त 1947 – सितंबर 1951 )
     भारतीय संविधान सभा की मसौदा समिती के अध्यक्ष (29 अगस्त 1947 –24 जनवरी 1950 )
     श्रम मंत्री, वायसराय की कार्य-परिषद ( जुलाई 1942 – 1946 )
     संविधान की मसौदा समिति के अध्यक्ष ( 29 अगस्त 1947 , स्वतंत्र भारत के नए संविधान की रचना
      के  लिए बनी )

                                   ------- पुस्तकें व अन्य रचनाएँ --------
   1. अनहिलेशन ऑफ कास्ट
   2. द बुद्ध अँड हिज धम्म
   3. कास्ट इन इंडिया
   4. हू वेअर द शूद्राज 
   5. रिडल्स इन हिंदुइझम
                                  ----- भाषाए जिनकी जानकारी रखते थे ------

                                                          * 11 भाषाओं का ज्ञान था *

   1. मराठी (मातृभाषा)                         5. संस्कृत                            09. बंगाली
   2. अंग्रेजी                                          6. जर्मन                             10. कन्नड
   3. हिन्दी                                            7. फारसी                           11. गुजराती
   4. पालि                                              8. फ्रेंच